अपनी बहुत सी कल्पनाओं के साथ साथ जिंदगी को हर रूप में सराहा है, कुछ पाया, कुछ गंवाया है और बस यूं ही चलता रहा है जिंदगी का सफर।
कभी अनुभूतियां, तो कभी दर्द पिघल आता है... शब्द बन बरस जाता है। फिर भी चलते हैं.... कभी तलाशते हैं सुकूं भीतर कभी बाहर, निश्चल निःशब्द चीज़ों में जो बिन शब्दों के बहुत कुछ कह जाती हैं, बालों में उंगलियां फिरा हवा सी गुज़र जाती हैं...
बहुत खूबसूरत चित्र
ReplyDeleteयायावर बादल मानों ठहर से गये हों